पहले हजारों की भीड़, अब गिने-चुने समर्थक! क्या CJP का आंदोलन कमजोर पड़ गया?

 जंतर-मंतर का विरोध अब किस मोड़ पर? भीड़ कम हुई, लेकिन CJP के समर्थकों का हौसला अभी भी बरकरार

by- AJEET KUMAR

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP आंदोलन की घटती भीड़ दिखाती न्यूज़ थंबनेल, जिसमें पहले की भारी भीड़ और वर्तमान की कम भीड़ की तुलना दिखाई गई है।

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ CJP (Cockroach Janata Party) का आंदोलन पिछले कुछ हफ्तों से लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। जब इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हुई थी, तब बड़ी संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न राज्यों से आए समर्थक जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे। सोशल मीडिया पर आंदोलन की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हुए और ऐसा लगा कि यह विरोध प्रदर्शन आने वाले समय में एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।

प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाई और अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए लगातार धरना दिया। समय बीतने के साथ आंदोलन और तेज हुआ तथा कई प्रदर्शनकारियों ने भूख हड़ताल का रास्ता भी अपनाया। उनका कहना था कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

अब जंतर-मंतर पर पहले जैसी भीड़ क्यों नहीं दिख रही?😁

शुरुआत में जंतर-मंतर पर हजारों लोगों की मौजूदगी दिखाई दे रही थी। लेकिन धीरे-धीरे समय बीतने के साथ कई लोग अपने-अपने घर लौट गए। कुछ लोगों को नौकरी, पढ़ाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण वापस जाना पड़ा, जबकि कुछ समर्थक सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन का समर्थन जारी रखे हुए हैं।

आज यदि जंतर-मंतर की तस्वीरों को देखा जाए तो साफ दिखाई देता है कि पहले की तुलना में भीड़ काफी कम हो चुकी है। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि आंदोलन पूरी तरह खत्म हो गया है। अभी भी कुछ लोग लगातार वहीं डटे हुए हैं और उनका कहना है कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक पीछे नहीं हटेंगे।

प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग क्या है?💃

आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनकी पहली और सबसे प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। उनका आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े जिन मुद्दों को लेकर उन्होंने आवाज उठाई है, उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

इसके अलावा प्रदर्शनकारी यह भी मांग कर रहे हैं कि यदि किसी अधिकारी या संबंधित व्यक्ति की भूमिका किसी कथित गड़बड़ी में सामने आती है, तो उसके खिलाफ निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने पर उसे उसके पद से हटाया जाए। उनका कहना है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

भूख हड़ताल से क्या बदला?👱

आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल ने इस विरोध को नई पहचान दी। इससे देशभर का ध्यान एक बार फिर जंतर-मंतर की ओर गया। कई सामाजिक संगठनों और लोगों ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया।

हालांकि प्रदर्शनकारियों का मानना है कि अब तक उनकी मुख्य मांगों पर कोई ऐसा बड़ा फैसला सामने नहीं आया है, जिसे आंदोलन की सीधी सफलता कहा जा सके। यही कारण है कि आंदोलन से जुड़े लोग अब भी संघर्ष जारी रखने की बात कर रहे हैं।

क्या कम होती भीड़ आंदोलन की कमजोरी है?

किसी भी लंबे आंदोलन में समय के साथ भीड़ का कम होना असामान्य बात नहीं है। आर्थिक स्थिति, पढ़ाई, नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण हर व्यक्ति लंबे समय तक धरना स्थल पर मौजूद नहीं रह सकता।

ऐसे में किसी आंदोलन की ताकत केवल भीड़ से नहीं, बल्कि उसके उद्देश्य, नेतृत्व, जनसमर्थन और सरकार के साथ होने वाली बातचीत से भी तय होती है।

क्या CJP का आंदोलन सफल हो पाएगा?

यह सबसे बड़ा सवाल है, जिसका जवाब हर कोई जानना चाहता है।

यदि सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर बातचीत करती है, जांच प्रक्रिया तेज होती है और ठोस फैसले लिए जाते हैं, तो आंदोलन को आंशिक या पूर्ण सफलता मिल सकती है। लेकिन यदि लंबे समय तक कोई बड़ा निर्णय नहीं लिया जाता, तो आंदोलन का प्रभाव धीरे-धीरे कम भी हो सकता है।

फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि जंतर-मंतर पर मौजूद लोग अभी भी अपने उद्देश्य से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता।

निष्कर्ष

जंतर-मंतर का यह आंदोलन अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है जहां भीड़ पहले जैसी नहीं रही, लेकिन आंदोलन पूरी तरह समाप्त भी नहीं हुआ है। कुछ लोग वापस अपने घर लौट चुके हैं, जबकि कई समर्थक अब भी डटे हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया, जनता का समर्थन और आंदोलन की रणनीति ही तय करेगी कि यह विरोध प्रदर्शन अपने लक्ष्य तक पहुंच पाएगा या नहीं।

आपकी क्या राय है?
क्या आपको लगता है कि जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन अपनी प्रमुख मांगों को मनवाने में सफल होगा? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।

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